महाशिवरात्रि पर्व 21 फरवरी को मनाया जाएगा। पाकिस्तान में महाशिवरात्रि पर्व के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसके लिए बलूचिस्तान के जौब में 200 साल पुराने हरि मंदिर को शुक्रवार को महाशिवरात्रि के लिए खोल दिया गया है। इसी तरह इस्लामाबाद में भी हाल ही में बने शिव मंदिर को शिवभक्तों के लिए खोल दिया गया है। इसके अलावा पेशावर, मुजफराबाद, लाहौर के कृष्णा और वाल्मीकि मंदिर, रावलपिंडी के इसी नाम के दो और मंदिरों में भी महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। बताया जाता है कि इन जगहों पर अल्पसंख्यकों के अलावा मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल होते हैं।
- पाकिस्तान के सिंध प्रांत के चकवाल जिले में स्थित भगवान शिव के कटासराज मंदिर में भी शिवरात्रि पर्व के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। वहीं पिछले साल पुलवामा हमले और उसके बाद एयर स्ट्राइक होने के कारण शिवरात्रि पर भारत से कोई भी श्रद्धालु दर्शन करने नहीं पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद पाक सरकार मंदिर को यूनेस्को की हैरिटेज लिस्ट में लाने के प्रयास कर रही है। इस वजह से दिसंबर 2019 मे भारत से कटासराज मंदिर दर्शन के लिए 97 भारतीय श्रद्धालु गए थे। इसलिए शिवरात्रि पर भी इस मंदिर में कईं श्रद्धालुओं के जाने की संभावना है।
कटासराज में तैयारियां जारी
पाकिस्तान के चकवाल जिला स्थित कटासराज में महाशिवरात्रि पर्व मनाने के लिए तैयारियां जोरों-शोरों पर चल रही हैं। एक्यू ट्रस्ट प्रापर्टी बोर्ड के एडिशनल सेक्रेटरी फराज अब्बास ने बताया कि हिंदुस्तान से आने वाले हिंदू भाईचारे के लिए हर तरह की व्यवस्था की जा रही है। इसके तहत सरोवर इसके व आसपास साफ-सफाई का काम शुरू किया गया है। उनका कहना है कि दूसरी जगहों के मंदिरों के लिए भी उनकी सरकार खास बंदोबस्त कर रही है।
करीब 900 साल पुराना है कटासराज मंदिर
करीब 900 साल पुराना भगवान शिव का कटासराज मंदिर लाहौर से 280 किमी दूर पहाड़ी पर बना है। ये मंदिर पाकिस्तान के सिंध प्रांत के चकवाल जिले में है। ये चकवाल से लगभग 40 कि.मी. की दूरी पर कटस नामक स्थान में एक पहाड़ी पर है। इस स्थान से जुड़ी कई मान्यताएं हैं, इसलिए ये हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। एक मान्यता के अनुसार देवी जब सती हुईं थी तब भगवान शिव की आंखों से आंसू निकले थे। उनसे ही यहां पर कुंड का निर्माण हुआ। ये कुंड 150 फीट लंबा और 90 फीट चौड़ा है।